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जब मैं छोटा था, दादी से बारी-बारी से देवताओं and अस्त्रों की कहानियां सुनता था। उनकी बातों में ‘ब्राह्मास्त्र’ नाम आता था, जिसे सबसे शक्तिशाली अस्त्र कहा जाता था – इतना शक्तिशाली कि इसका गलत प्रयोग दुनिया का विनाश कर सकता है। सालों बाद जब अयान मुखर्जी की film Brahmastra रिलीज़ हुई, तो लगा जैसे बचपन की वही कथाएँ आधुनिक सिनेमा के माध्यम से जीवंत हो उठीं।
Brahmastra: Part One – Shiva एक fantasy adventure film है, जिसे अयान मुखर्जी ने ‘Astraverse’ नामक सिनेमाई ब्रह्मांड की शुरुआत के रूप में बनाया। कहानी का आरंभ प्राचीन भारत में होता है, जहां ऋषि‑मुनि ब्रह्म‑शक्ति का उपयोग कर शक्तिशाली अस्त्र बनाते हैं – अग्नि अस्त्र, वायू अस्त्र, जल अस्त्र आदि – जिनमें सबसे शक्तिशाली ब्रह्मास्त्र है, जिसे ‘ब्रह्मांश’ नामक गुप्त समाज संरक्षित करता है।
वर्तमान में कहानी मुंबई से शुरू होती है, जहां शिवा (रणबीर कपूर) एक युवा डीजे है, जिसे आग से चोट नहीं लगती। काली पूजन की रात उसके जीवन में ईशा (आलिया भट्ट) आती है, and दोनों के बीच मोहब्बत शुरू होती है। शिवा अक्सर अजीब सपने देखता है, जिनमें वह आग से घिरा होता है and किसी अधेड़ व्यक्ति की हत्या होती देखता है। इन सपनों के दौरान उसे ‘ब्रह्मशक्ति’ का आभास होता है। उसी दौरान दिल्ली में ब्रह्मांश के एक सदस्य मोहन (शाहरुख खान) पर हमला होता है। जुनून (मौनी रॉय), जो ब्रह्मास्त्र के तीन हिस्सों को हासिल करने की कोशिश कर रही है, मोहन को मार कर पहला हिस्सा चुरा लेती है।
शिवा को पता चलता है कि उसका सपना असल में एक चेतावनी था। वह ईशा के साथ वाराणसी जाता है, जहां ब्रह्मांश के दूसरे सदस्य अनिमीश (नागार्जुन) पर हमला होने वाला है। वे उन्हें बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन जुनून दूसरा हिस्सा चुरा लेती है and अनिमीश को भी मार देती है। शिवा समझता है कि उसे ब्रह्मांश के गुरु (अमिताभ बच्चन) के पास जाना होगा। हिमालय में छिपी ब्रह्मांश की ‘आश्रम’ में गुरु उसे बताते हैं कि वह स्वयं अग्नि अस्त्र का अधिपति है and उसकी मां अमृता (दीपिका पादुकोण) and पिता देव दोनों शक्तिशाली अस्त्रधारी थे। वर्षों पहले देव को ब्रह्मास्त्र की शक्ति से पागलपन हो गया था; अमृता ने उसे रोकने के लिए उसे पत्थर में कैद किया, लेकिन ब्रह्मास्त्र के तीन हिस्से बिखर गए।
अब जुनून देव के वंशज के आदेश पर उन टुकड़ों को जोड़ रही है ताकि देव वापस आकर दुनिया पर राज कर सके। शिवा अपनी शक्ति को नियंत्रित करना सीखता है, लेकिन तभी जुनून गुरुकुल पर हमला करती है and ब्रह्मास्त्र के तीसरे हिस्से को चुरा लेती है। रहस्य खुलता है कि शिवा खुद देव and अमृता का बेटा है and जूनून उसकी बहन जैसी है। क्लाइमेक्स में शिवा अपने प्रेम – ईशा – की मदद से अपनी आग की शक्ति को नियंत्रित करता है and जूनून को हराकर ब्रह्मास्त्र को जोड़ने से रोकता है। लेकिन पोस्ट‑क्रेडिट दृश्य में संकेत मिलता है कि देव अभी भी जीवित है and आने वाले हिस्सों में लौटेगा।
अयान मुखर्जी ने पहली बार भारतीय पौराणिक कथाओं को सुपरहीरो शैली में ढाला। उनका विज़न बड़ा, विस्तृत and तकनीकी रूप से महत्वाकांक्षी था। रणबीर कपूर ने शिवा के रूप में एक उलझे हुए, प्यारे and शक्तिशाली किरदार को बखूबी निभाया। उनका चेहरा एक समय प्यार में डूबा दिखाई देता है, तो अगले ही पल आग की लपटों में वीर योद्धा बन जाता है। आलिया भट्ट ने ईशा के रूप में बिना शक्तियों वाली लेकिन साहसी लड़की का किरदार निभाया, जो अपने प्यार की खातिर खतरों में कूद पड़ती है। अमिताभ बच्चन ने गुरु के रूप में गंभीरता and गुरुता दिखाई। मौनी रॉय ने जूनून में रहस्य and क्रूरता का मिश्रण पेश किया।

film का म्यूजिक प्रीतम ने दिया है। गाना ‘केसरिया’ रिलीज़ होने से पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था and विवाहित जोड़ों की पसंदीदा ट्रैक बन गया। ‘देवा देवा’ गाना शिवा की शक्ति जागरण का प्रतीक है and अरण्य के दृश्यों में खूबसूरती से फिल्माया गया है। पृष्ठभूमि संगीत भारतीय शास्त्रीय and वेस्टर्न ऑर्केस्ट्रा का मिश्रण है।
तकनीकी रूप से यह film भारतीय cinema की सबसे महंगी प्रोजेक्ट्स में से एक है। वीएफएक्स टीम ने आग, पानी and ऊर्जा के रूप में अस्त्रों को दिखाने के लिए हजारों शॉट्स बनाए। डोबी डिजिटल साउंड ने थियेटर अनुभव को बढ़ाया। कुछ दर्शकों ने कहानी की गति and dialog पर सवाल उठाया, लेकिन तकनीकी प्रस्तुति ने इसे एक बड़ा थिएटर अनुभव बनाया।
film भारतीय युवाओं को अपनी जड़ों and पौराणिक कथाओं से जुड़ने का अवसर देती है। यह आधुनिक प्रेम कहानी and पारिवारिक रिश्तों के माध्यम से बताती है कि शक्ति का सही इस्तेमाल समाज की भलाई के लिए होना चाहिए। शिवा के भीतर निहित शक्ति तभी नियंत्रित होती है, जब वह प्यार, मित्रता and गुरु के मार्गदर्शन को स्वीकार करता है – यह दर्शाता है कि सामूहिक प्रयास and निजी दिमाग दोनों ज़रूरी हैं।
film ने राष्ट्रीय film पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ film (एवीजीसी), सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन (प्रीतम) and सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्वगायक (अरिजीत सिंह) का पुरस्कार जीता। बॉक्स ऑफिस पर यह 2022 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों में रही। यह ‘Astraverse’ की पहली किस्त है, जिसके अगले भाग की प्रतीक्षा की जा रही है।
film की योजना लगभग एक दशक तक चलती रही; अयान मुखर्जी ने इसे 2011 से लिखना शुरू किया। उन्होंने नासा जैसी अनुसंधान एजेंसियों से ऊर्जा के बहाव के बारे में समझा ताकि वीएफएक्स टीम ब्रह्मास्त्र के दृश्यों को वैज्ञानिक रूप से विश्वसनीय बना सके। यह film भारत की पहली ऐसी film बनी, जिसमें रूपांतरित कॉमिक यूनिवर्स (Astraverse) की अवधारणा को विस्तारित करने की योजना है, and भविष्य में इसके कई सीक्वल and स्पिन-ऑफ आने वाले हैं।