
बचपन में मेरी दादी मुझे दक्षिण भारत के चोल राजाओं की कहानियां सुनाया करती थीं – समुद्र में जहाज चलाने वाले, मंदिर निर्माण कराने वाले, and उनका गौरवशाली साम्राज्य। जब मणिरत्नम की film Ponniyin Selvan: I रिलीज़ हुई, तो मानो इन कहानियों को रंग, संगीत and नाट्य में जीने का मौका मिल गया।
film पाँच भागों वाली प्रसिद्ध तमिल उपन्यास श्रृंखला ‘Ponniyin Selvan’ (लेखक – कल्कि कृष्णमूर्ति) पर आधारित है। कहानी 10वीं शताब्दी के शक्तिशाली चोल साम्राज्य में घटित होती है। सम्राट सुंदर चोल अपने तीन बच्चों – राजकुमार आदित्य करिकालन (विक्रम), राजकुमारी कुंदवई (तृषा), and अरुलमोझी वर्मन उर्फ़ ‘पोनियिन सेल्वन’ (जयम रवि) – के बीच सत्ता स्थानांतरण and षड्यंत्रों से घिरे हैं।
कहानी की शुरुआत में युवराज आदित्य करिकालन अपने पिता की सेना का नेतृत्व कर रहे हैं and पांड्या विद्रोहियों को कुचल चुके हैं। उनका दोस्त और राजदूत वंदियादेवन (कार्थी) का मुख्य काम है संदेश पहुँचाना – पहले अपनी बहन कुंदवई को, फिर राजा सुंदर चोल को। वंदियादेवन जब राजधानी कांचीपुरम पहुंचता है, तब वह सुनता है कि कुछ कुलीन लोग राजकुमार आदित्य की जगह उनके चचेरे भाई मदुरांतक को राजा बनाने की साजिश कर रहे हैं। साजिशकर्ताओं में शक्तिशाली राजमाता नंदिनी (ऐश्वर्या राय बच्चन) भी शामिल है, जिसका पति वीर पांड्या विद्रोह में मारा गया था। वह चोल राजवंश से बदला लेना चाहती है।
वंदियादेवन योजनाओं को भांप कर कुंदवई से मिलता है, जो बुद्धिमती राजकुमारी है and चोल साम्राज्य की सच्ची हितैषी। वह उसे आदेश देती है कि वह लंका जाए and अपने छोटे भाई अरुलमोझी वर्मन को तुरंत वापस ले आए, क्योंकि उसके जीवन पर खतरा मंडरा रहा है। उधर अरुलमोझी वर्मन लंका (श्रीलंका) में सैन्य अभियान चला रहे हैं and वहां के लोगों द्वारा उसे ‘पोनियिन सेल्वन’ – यानी ‘पोनियिन नदी का पुत्र’ – कहा जाता है।
मध्यांतर में वंदियादेवन समुद्री रास्ते से लंका जाता है, जहाज पर जलदस्युओं से लड़ता है, and अंततः अरुलमोझी से मिलता है। लेकिन खतरनाक समुद्री तूफान के दौरान उनका जहाज डूब जाता है, and राज्य में खबर फैलती है कि युवराज डूब गए हैं। साजिशकर्ता इस ग़लतफहमी का लाभ उठाते हैं। कहानी का अंत अगले भाग के लिए खुला छोड़ता है, जिससे दर्शकों को उत्सुकता बनी रहती है।
मणिरत्नम ने दो हिस्सों में बनी इस महागाथा के पहले भाग को भव्य पैमाने पर प्रस्तुत किया है। उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों and कल्पना का संतुलित मिश्रण रखा। विक्रम ने आदित्य करिकालन के रूप में एक गुस्सैल and वीर राजकुमार का चित्रण किया है। जयम रवि ने शांत, धर्मपरायण and प्रजा प्रेमी पोनियिन सेल्वन के किरदार में निष्ठा दिखाई। कार्थी का वंदियादेवन किरदार दर्शकों का फेवरेट है – चंचल, साहसी and चालाक। ऐश्वर्या राय बच्चन ने नंदिनी के रूप में कूटनीति, बदला and मोहकता का संगम दिखाया। तृषा के कुंदवई किरदार में बौद्धिकता and नेतृत्व गुण है।

A.R. रहमान द्वारा रचित संगीत में ‘पोन्नियिन नाधि’ and ‘राका था’ जैसे गीत film की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को and भव्य बनाते हैं। उनके पृष्ठभूमि स्कोर ने समुद्री लड़ाइयों, महल की साजिशों and वीरता के क्षणों को भावनात्मक ऊंचाई दी। रवि वर्मन की सिनेमैटोग्राफी को भारत के विभिन्न हिस्सों – महाबलीपुरम के मंदिरों, गोदावरी के डेल्टा, and श्रीलंका के हरे भरे जंगलों – में शूट किया गया है, जो इतिहास and प्रकृति को शानदार तरीके से दिखाती है। कॉस्ट्यूम design में 10वीं शताब्दी के कपड़े, आभूषण and हथियार शोध के साथ तैयार किए गए हैं।
हालांकि यह film ऐतिहासिक है, पर इसमें सत्ता संघर्ष, नारी शक्ति, and राष्ट्रप्रेम जैसे तत्व आज भी प्रासंगिक हैं। कुंदवई and नंदिनी का द्वंद्व दिखाता है कि महिलाओं ने इतिहास में राजनीतिक चालों को किस तरह से प्रभावित किया है। राजा की बीमारी and उत्तराधिकारी चुनने की दुविधा में साम्राज्य के वफादारों की निष्ठा का परीक्षण होता है।
film को राष्ट्रीय film पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ तमिल film, सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफी, सर्वश्रेष्ठ ध्वनि design and सर्वश्रेष्ठ पृष्ठभूमि संगीत का पुरस्कार मिला। film ने घरेलू and अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर भी सफलता हासिल की and इसे एशियाई film पुरस्कारों में कई श्रेणियों में नामांकन मिला।
‘Ponniyin Selvan’ के film संस्करण का सपना director मणिरत्नम पिछले 30 वर्ष से संजो रहे थे। पहले कमल हासन and रजनीकांत को भूमिकाओं के लिए सोचा गया था, पर बजट समस्याओं के कारण प्रोजेक्ट स्थगित होता रहा। अंततः तकनीकी उन्नति and बड़े प्रोडक्शन हाउस की मदद से यह सपना साकार हुआ।