मोह

ना कुछ लेकर आए थे।

ना कुछ लेकर जाना है।

फिर भी फंसे हैं, क्यों?

मोह जाल में, सब कुछ यहीं रह जाना है ।

वर्तमान भूल कर, क्यों?

भविष्य की चिंता में पड़ जाना है ।

भविष्य का कहां कोई ठौर ठिकाना !

कब जीना है, कब मर जाना है।

मोह माया भी निर्जीव चीजों से ,क्यों?

अपनों को ठुकराना है।

अपने दूर चले जाएंगे एक दिन,

बस यह चीजें ही रह जाना है।


तारीख: 16.09.2025                                    निधी खत्री




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