
ना कुछ लेकर आए थे।
ना कुछ लेकर जाना है।
फिर भी फंसे हैं, क्यों?
मोह जाल में, सब कुछ यहीं रह जाना है ।
वर्तमान भूल कर, क्यों?
भविष्य की चिंता में पड़ जाना है ।
भविष्य का कहां कोई ठौर ठिकाना !
कब जीना है, कब मर जाना है।
मोह माया भी निर्जीव चीजों से ,क्यों?
अपनों को ठुकराना है।
अपने दूर चले जाएंगे एक दिन,
बस यह चीजें ही रह जाना है।