
बीते जमाने में शादी बिना देखे हुआ करती थी।
ना लड़की पढ़ा करती थी ना ,लड़की की चला करती थी।
कितना बड़ा है बंगला कितनी बड़ी अटारी ,
यही देखकर ब्याही जाती थी बेचारी।
लड़का नहीं कमाता इसमें क्या हरज है।
दहेज मिल रहा है कमाने की क्या गरज है।।
दहेज मिलता था ,दुल्हन बिका करती थी ।
बिना दहेज वाली दुल्हन जला करती थी।
अरमानों की चिता तो पहले ही जल जाती थी।
बस, बच जाती थी लाश तो वह भी जला दी जाती थी।
सोच है पुरानी जमाना बदल गया है ।
दहेज मांगने का अंदाज अब नया है।
लड़की पढ़ा रहे हैं नौकरी करा रहे हैं ।
कुछ तो दहेज के नाम पर कमाऊ लड़की ला रहे हैं।