कड़वा सच

ना कुछ आया था,साथ हमारे। 

ना कुछ साथ में ,जाएगा। 

फिर क्यों फंसे हैं!मोह जाल में,

सब कुछ यहीं रह जाएगा।

निर्जीव चीज को मानकर अपना ,

जब अपनों को ठुकराएगा।

 निर्जीव चीजें हीं!बस रह जाएंगी,

अपना( रिश्ता) एक दिन चला जाएगा ।

मैं मेरा करते-करते यह ,जीवन ही कट जाएगा।

 रह जाएंगे बस कर्म हमारे,

जो अच्छा बुरा बतलाएगा।

मोह माया के बंधन को छोड़,

जो सतगुरु को अपनाएगा ।

वही मोक्ष पायेगा जो,

मोह से दूर हो जाएगा।


तारीख: 18.09.2025                                    निधी खत्री




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