
ना कुछ आया था,साथ हमारे।
ना कुछ साथ में ,जाएगा।
फिर क्यों फंसे हैं!मोह जाल में,
सब कुछ यहीं रह जाएगा।
निर्जीव चीज को मानकर अपना ,
जब अपनों को ठुकराएगा।
निर्जीव चीजें हीं!बस रह जाएंगी,
अपना( रिश्ता) एक दिन चला जाएगा ।
मैं मेरा करते-करते यह ,जीवन ही कट जाएगा।
रह जाएंगे बस कर्म हमारे,
जो अच्छा बुरा बतलाएगा।
मोह माया के बंधन को छोड़,
जो सतगुरु को अपनाएगा ।
वही मोक्ष पायेगा जो,
मोह से दूर हो जाएगा।