कलम


सुना है ,
भूख का स्वाद चख कर कलम रोटी पर लिखती है !
फटी जेब से झांकती कलम दौलत पर लिखती है!


सात तालों में छटपटाती कलम आज़ादी पर लिखती है!
दिनभर काम ढूंढती कलम रोजगार पर लिखती है!


परदेस में  उदास बैठी कलम देशप्रेम पर लिखती है!
बेसहारा भटकती कलम परिवार पर लिखती है!


मेरी कलम बस प्रेम पर लिखती है!


तारीख: 07.04.2020                                                        सुजाता






नीचे कमेंट करके रचनाकर को प्रोत्साहित कीजिये, आपका प्रोत्साहन ही लेखक की असली सफलता है