आ जाओ मेरे जीवन में


आ जाओ मेरे जीवन में
मेघ मल्हार सावन बनके
छा जाओं मेरे सूने मन में
सतरंगी इंद्रधनुष बनके
निरे घोर सन्नाटे में तुम
गुनगुनाओं सरगम बनके
चहचहाती चिड़ियों सी
तुम स्वच्छंद गीत बनके
जीवन के एकाकीपन में
ओज़ भरों संगीत बनके
प्रातः की रश्मियों सी
बहो मन मे ऊर्जा बनके
तुम मेरे इस बुझे मन में
दो उष्मा सविता बनके
ढांक लो हर कमी मेरी
बांहो का आकाश बनके
मेरी यात्रा के आदि अंत में
चलो संग हमराह बनके
बढ़े विश्वास की डगर पे
सब कुछ समर्पण करके
हो मुझमे तेरी, तुझमें मेरी
छवि बने इक दर्पण बनके
छा जाओं मेरे सूने मन में
सतरंगी इंद्रधनुष बनके
आ जाओ मेरे जीवन में
मेघ मल्हार सावन बनके


तारीख: 06.04.2020                                                        नीरज सक्सेना






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