पत्रकार की पहचान

 

धूप और छाँव की परवाह कभी ना ये करते है,
खबर में हमेंशा सच का आधार ये रखते है।

किसानों की बेबसी कभी दंगो की हाहाकार,
कभी गरीबी की लङाई और कभी मंहगाई की मार।

तीखे हथियारो का प्रयोग नही ये करते हैं,
अपने शब्दों के बाणो से ही मार्ग में आगे बढ़ते हैं ।

न तीर न कमान न कोई तलवार है,
इनके पास तो सिपाही इनका अखबार है।

पत्रकारिता है ऐसा अद्भूत चमत्कारी दर्पण,
जिसमे सब कुछ करना पङता है अर्पण।

आजादी के परवानो ने भी अखबार निकाले थे,
जोखिम और साहसी जनो के चर्चे उनमे छपते थे ।

जो खबरो को लिखते भेजते और छापते है,
आगे बढकर जीवन में वही संपादक बन जाते है।

आज अखबार और पत्रिकाओ ने भी नया कैरियर बनाया है,
पत्रकारिता की डिग्री पाने को संस्थानों ने कोर्स चलाया है।

प्रकाशन से जादू हर कोई ना दिखा पाया हैं,
लेखनी में हैं जिसके ताकत वही कलम का सच्चा सिपाही कहलाया है ।

जिसकी लेखनी से कायम हुआ अखबार होता हैं,
वही सत्यनिष्ठ इंसान ही हमेशा पत्रकार होता है।


तारीख: 18.08.2019                                                        शालू मिश्रा






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