
शहर होंगे उद्दंड
मुझको ऐसा फील हुआ!
पनप रहा अपराध का
एक जंगल!
द्वार पर बिल्ली सा
बैठा अमंगल!!
कोरोना के चलते
सारा दफ्तर सील हुआ!
गाँव बहुत ही
नम्र विनीत हो गए!
खेत ऋतुओं के
यानि मीत हो गए!!
पोखर का पानी
पावस में मानो झील हुआ!
समाज में अनाचार के
विषधर हैं!
शांति के कपोत
खूं से तर बतर हैं!!
गौरैया की पहरेदारी
करने चील हुआ!