
किरणों के
झूले में
झूल रहा दिन।
फूलों के हैं
छलक पड़े जज्बात।
तितली की बाग में
रसभीनी बात।।
बुझी बुझी
भोर को
भूल रहा दिन।
वन में फुनगी का
हवा में डोलना।
डूबते रवि का
लाल रंग घोलना।।
चुभते-चुभते
से पल
शूल रहा दिन।
शाम को फैल गई
मदमाती गंध।
रात ने अपनी
कर लीं पलकें बंद।।
ऋषियों के
पैरों की
धूल रहा दिन।