तुम्हारा फोन आया है


इस उदास मन में,
आज फिर एक उमंग आया है।
तुम्हारा फोन आया है, 
तुम्हारा फोन आया है।


सूनी पड़ी गलियों ने,
मुझे फिर से पुकारा था।
मेरे इस नाजुक से दिल को,
हर किसी ने आजमाया था।


बरखा थी संसार में सारे,
पर मन उपवन में सूखा था।
ऐसा लग रहा था मानो,
सारा जीवन रूखा था।


किंतु अचानक रिंगटोन सुन,
मन फिर से हर्षाया है।
तुम्हारा फोन आया है,
तुम्हारा फोन आया।


तारीख: 29.05.2020                                                        माता प्रसाद संजीव






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